दोस्तों, क्या आप जानते हैं कि जिंदगी के पहले 5 साल हमारे दिमाग के लिए सुनहरा अवसर होते हैं? यही वह समय है जब दिमाग की असली नींव पड़ती है। जैसे किसी मकान की बेसिक यूनिट ईंट होती है, वैसे ही हमारे दिमाग की बेसिक यूनिट को न्यूरॉन कहते हैं। इन्हीं से मिलकर हमारा दिमाग बना होता है।

जब हम पैदा होते हैं, तब हमारे दिमाग में लगभग 86 बिलियन (86 अरब) न्यूरॉन्स होते हैं, जो कि एडल्ट में पाए जाने वाले न्यूरॉन्स के बराबर हैं। यानी कि एक न्यू बॉर्न बेबी में उतने ही न्यूरॉन्स होते हैं जितने कि एक एडल्ट में होने चाहिए। लेकिन फर्क यह है कि न्यू बॉर्न बेबी में इन न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन बहुत कम होते हैं।

पहले 2–3 साल में यह कनेक्शन तेजी से बढ़ते हैं और इस प्रक्रिया को Synaptogenesis कहते हैं। सोचिए, एक बच्चे के दिमाग में हर सेकंड लगभग 10 लाख नए कनेक्शन बनते हैं।

न्यूरॉन्स कैसे जुड़ते हैं?

जब बच्चा कुछ देखता, सुनता या महसूस करता है, तो न्यूरॉन्स के बीच इलेक्ट्रिक सिग्नल्स का आदान-प्रदान होता है। अगर यह अनुभव बार-बार दोहराया जाए तो यह कनेक्शन और मजबूत होते जाते हैं। इसे कहते हैं: “Neurons that fire together, wire together”। इसके उलट, जिन कनेक्शंस का इस्तेमाल नहीं होता, उन्हें दिमाग डिलीट कर देता है। इसे Pruning कहते हैं।

पहले 6 साल क्यों खास हैं?

6 साल की उम्र तक दिमाग के लगभग 90% कनेक्शन और वायरिंग हो जाती है। यही कनेक्शन और वायरिंग तय करती है कि बच्चा आगे आने वाले 70–80 सालों तक अपने जीवन को किस तरह जिएगा।

यानी आपका बच्चा जैसा सुनेगा, देखेगा और महसूस करेगा, वैसा ही उसके न्यूरोनल कनेक्शन बनेंगे और बड़े होकर वैसी ही सोच, आदतें और यादें विकसित होंगी।

माता-पिता और वातावरण की भूमिका

इसीलिए हमें बच्चों को पॉजिटिव, स्टिमुलेटिंग और सुरक्षित वातावरण देना चाहिए। ताकि उनके न्यूरोनल सर्किट मजबूत बन सकें और आगे चलकर वे अपने लिए, अपने परिवार के लिए और समाज के लिए एक सकारात्मक व्यक्ति बनें।

बचपन में प्यार, सुरक्षा और सीखने के मौके देना ही भविष्य के लिए सबसे बड़ा तोहफा है। क्योंकि जिंदगी की शुरुआत में बना दिमाग का नक्शा पूरी उम्र हमारे साथ चलता है।

धन्यवाद।