Anand
30 August 2025
डिप्रेशन और डायबिटीज के बीच गहरा संबंध है।
डिप्रेशन डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है और डायबिटीज डिप्रेशन का। यानी दोनों का एक बाय-डायरेक्शनल कनेक्शन है।
डिप्रेशन डायबिटीज को कैसे प्रभावित करता है?
डिप्रेशन डायबिटीज को दो तरीकों से प्रभावित करता है:
1) लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण
- डिप्रेशन की वजह से मरीज भूलने लगता है, उत्साह कम हो जाता है, नींद प्रभावित होती है।
- नतीजतन वह अपनी डायबिटीज की दवाइयाँ मिस कर देता है, एक्सरसाइज़ नहीं कर पाता।
- इसका सीधा असर ब्लड शुगर लेवल पर पड़ता है और डायबिटीज अनकंट्रोल हो जाती है।
2) बायोलॉजिकल कारण
- डिप्रेशन में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कॉर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है।
- कॉर्टिसोल ब्लड शुगर लेवल को और बढ़ा देता है।
- इसके अलावा इंफ्लेमेशन (Inflammation) भी होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और ब्लड शुगर और ज्यादा बढ़ जाता है।
डिप्रेशन से डायबिटीज का खतरा
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक डिप्रेशन से पीड़ित है, तो उसे डायबिटीज होने का जोखिम लगभग 60% अधिक होता है।
कारण है:
- लगातार स्ट्रेस हार्मोन का बढ़ा स्तर
- लाइफस्टाइल में नेगेटिव बदलाव
डायबिटीज से डिप्रेशन का खतरा
अगर किसी को डायबिटीज है तो उसे डिप्रेशन होने का जोखिम 20% से 30% अधिक होता है।
डिप्रेशन, डायबिटीज और हाइपरटेंशन: तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा
- डिप्रेशन डायबिटीज का रिस्क बढ़ाता है।
- डायबिटीज हाइपरटेंशन का रिस्क बढ़ाती है।
- हाइपरटेंशन भी डिप्रेशन और डायबिटीज दोनों का खतरा बढ़ा देता है।
यानी ये तीनों बीमारियाँ – डिप्रेशन, डायबिटीज और हाइपरटेंशन – आपस में गहराई से जुड़ी हैं।
ये न केवल जीवन की आयु (Life Span) घटाती हैं बल्कि जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) भी प्रभावित करती हैं।
टेक-होम मैसेज
- यदि कोई मरीज डायबिटीज से पीड़ित है और तमाम प्रयासों के बावजूद शुगर कंट्रोल नहीं हो पा रहा है, तो यह ज़रूरी है कि वह चेक करे कि कहीं उसे अनडायग्नोस्ड डिप्रेशन तो नहीं है।
- यदि कोई मरीज लंबे समय से डिप्रेशन से जूझ रहा है, तो उसके लिए डायबिटीज और हाइपरटेंशन का जोखिम अधिक है। ऐसे में समय-समय पर ब्लड शुगर और बीपी की जांच कराते रहना चाहिए।
✍️ लेखक: स्वास्थ्य जानकारी हेतु